• Hindi Poetry | कविताएँ

    विश्वास का दीया

    खुली हवा है वो आज़ादी की शीतल करे जो जब मध्धम चले एक ओर जो हो हावी तो बने आँधी कैसे तूफ़ानों में कोई दीया जले अलगाव की चिंगारी कहीं दामन ना लगे मिल के बढ़ने के लिए दिल भी…