विश्वास का दीया
खुली हवा है वो आज़ादी की शीतल करे जो जब मध्धम चले एक ओर जो हो हावी तो बने आँधी कैसे तूफ़ानों में कोई दीया जले अलगाव की चिंगारी कहीं दामन ना लगे मिल के बढ़ने के लिए दिल भी…
Poet | Author | Marketer
खुली हवा है वो आज़ादी की शीतल करे जो जब मध्धम चले एक ओर जो हो हावी तो बने आँधी कैसे तूफ़ानों में कोई दीया जले अलगाव की चिंगारी कहीं दामन ना लगे मिल के बढ़ने के लिए दिल भी…